चर्चा के चबूतरे पर देश की सबसे युवा सरपंच जबना चौहान

गरीब परिवार में जन्म, दसवीं के बाद आगे की पढ़ाई बंद करने का दबाव,लेकिन पढ़ने के लिए संघर्ष जारी रहा। मनरेगा में काम किया, रोज़-रोज़ बीसियों किलोमीटर का पैदल सफर, साथ-साथ छोटी सी नौकरी की… अपनी इसी ज़िद  के चलते वो ना सिर्फ सरपंच बनी बल्कि  उसने इतिहास रच दिया। अब ये सामान्य ज्ञान के
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कांग्रेस की मौजूदा स्थिति और चुनौतियां

  भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। भले ही आज वह अपने अस्तित्व के लिए नहीं लड़ रही है, लेकिन वह समय रहते नहीं संभलती है तो 2019 के आम चुनावों के बाद कांग्रेस पर अस्तित्व के संकट का सवाल ज़रूर खड़ा होगा । भारत जैसे विशाल देश में
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#SwachhBharat: Let us talk more about Responsibilities than Rights

  शाक्य भट्टाचार्यजी (@shakyadoc) I shall start with the stories of three gentlemen. The first story is related to a 27 years old postgraduate student cum social entrepreneur Jabir Karat. He took inspiration from environmentalist ‘Sunderlal Bahuguna’ and took up the cudgel for making his home state Kerala waste free. It was an ambitious, challenging and
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मोदी विरोध की अंतर्कथा

“मोदी से कुछ लोग इस हद तक घृणा करते हैं कि इस असंगत घृणा की वजह से कई सारे राजनैतिक विश्लेषक अपनी निष्पक्षता/वस्तुनिस्ठता खो रहे हैं। उनको (मोदी को) घुटनों पर देखने के उतावलेपन में वे अर्थहीन शब्दों में अर्थ खोजते हैं” मेरे एक पत्रकार मित्र, जिन्हें मैं बहत लंबे समय से जनता हूँ, ने
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आज गांधी जिंदा होते तो तिहाड़ में होते!

‘आप ऐसा काम कर रहे हैं, जिससे किसी भी सरकार के लिए यह संभव नहीं कि वह आपको स्वतंत्र रहने दे।’ यह फैसला उस गोरे न्यायाधीश ब्रूम्सफील्ड का है, जिनके शब्दों में गांधी ‘महान नेता, ‘महान देशभक्त’, ‘उच्च स्तर के आदर्शवादी’ और ‘बेहद पवित्र’ थे। आखिर गांधी ऐसा क्या कर रहे थे कि किसी भी
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मीडिया: अब कितनी भरोसेमंद!

गुरुग्राम में हुए प्रद्युमन हत्याकांड ने पूरे देश को हिला कर रख दिया। आम मध्यम वर्गीय परिवार जीतोड़ मेहनत कर अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए क्या कुछ नहीं करते। अच्छे से अच्छे स्कूल में भेजना, बेहतर से बेहतर सुविधाएं देना परिवार और मां-बाप के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। वे सब
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विरह वेदना की अभिव्यक्ति है सावन मास

ऋतुओं में सावन महीने का अपना एक विशिष्ट महत्व है। यह महीना बड़ा ही मनभावन होता है। इसकी फुहार प्रकृति को तृप्त कर देती है। सावन का आगमन होते ही चारों ओर हरियाली छा जाती है। नैसर्गिक वातावरण और पेड़-पौधे की हरियाली तो मन को प्रसन्न करते ही हैं साथ ही साथ धानी चुनर में
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लघु कहानी: 'स्वीटी'

मंसूर पटेल मुंबई के रहने वाले हैं। मुंबई विश्वविद्यालय से ही हिंदी में एम.ए. करने के बाद पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। आकाशवाणी के लिए कई कार्यक्रम और कहानियां लिख चुके हैं। इन्होंने ‘चौपाल’ को अपनी एक लघु कहानी  ‘स्वीटी’ लिख भेजी है। आप भी पढ़िए…   डब्बू स्कूल से घर लौटा। लौटते हुए मछली वाली
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