# दम्पति या दम्पती?

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**Category:** व्याकरण\
**Tags:** वर्तनी, व्युत्पत्ति, प्रश्न\
**Created:** [March 13, 2023, 4:15am UTC](https://xn--61b6aya1cxd.xn--h2brj9c/t/%E0%A4%A6%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%80/185 "2023-03-13T04:15:53Z")\
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**Author:** ![Suresh\_Pant1](https://xn--61b6aya1cxd.xn--h2brj9c/user_avatar/xn--61b6aya1cxd.xn--h2brj9c/suresh_pant1/32/16_2.png) [@Suresh\_Pant1](https://xn--61b6aya1cxd.xn--h2brj9c/u/Suresh_Pant1)\
**Post date:** [March 13, 2023, 4:15am UTC](https://xn--61b6aya1cxd.xn--h2brj9c/t/%E0%A4%A6%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%80/185/1 "2023-03-13T04:15:54Z")

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हिन्दी में पति-पत्नी युगल के लिए तीन शब्द प्रचलन में हैं -

1. [दम्पति](https://xn--l1b6a9di5a0j.xn--h2brj9c/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%80/%E0%A4%B6%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%A6/%E0%A4%A6%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF/),
2. दम्पती और
3. दम्पत्ति

इनमें अन्तिम तो पहली ही दृष्टि में अशुद्ध दिखाई पड़ता है। लगता है इसे `सम्पत्ति-विपत्ति` की लय पर गढ़ लिया गया है और `मियाँ-बीवी` के लिए चेप दिया गया है। विवेचन के लिए दो शब्द बचते हैं - दम्पति और दम्पती।

पत्नी और पति के लिए एकशेष द्वंद्व समास संस्कृत में है - दम्पती। अब क्योंकि दम्पती में पति-पत्नी दोनों सम्मिलित हैं, इसलिए संस्कृत में इसके रूप द्विवचन और बहुवचन में ही चलते हैं अर्थात पति-पत्नी के एक जोड़े को “ **दम्पती** ” और दम्पतियों के एकाधिक जोड़ों को “ **दम्पतयः** ” कहा जाएगा।

वस्तुतः इसमें जो `दम्` शब्द है उसका संस्कृत में अर्थ है पत्नी। मॉनियर विलियम्ज़ की संस्कृत-इंग्लिश-डिक्शनरी में जो कुछ दिया है, उसका सार है:-

> दम् का प्रयोग ऋग्वेद से होता आ रहा है धातु (क्रिया) और संज्ञा के रूप में भी। ‘दम्’ का मूल अर्थ बताया गया है पालन करना, दमन करना। पत्नी घर में रहकर पालन और नियन्त्रण करती है इसलिए वह “घर” भी है। संस्कृत में ‘दम्’ का स्वतन्त्र प्रयोग नहीं मिलता। तुलनीय है कि आज भी लोक में घर का एक अर्थ पत्नी है।
> 
> व्याकरण में दम्पती का समास-विग्रह किया गया - `जाया च पतिश्च दम्पती`। फिर स्पष्ट भी किया गया “`जाया शब्दस्य दमादेशः`” अर्थात् जाया शब्द का दम् आदेश हो जाता है। जाया शब्द दम् बन जाता है।

इस प्रकार संस्कृत में तो “दम्पती” शुद्ध है, किन्तु हिन्दी में “ **दम्पति** ”, क्योंकि हिन्दी में द्विवचन नहीं होता और पति भी पती होना चाहिए, नहीं हो सकता। सो अतिशुद्धतावादी दम्पती का आग्रह क्यों करते हैं? अन्य भारतीय भाषाओं में भी दम्पति ही है। “दम्पती” को हिन्दी में चलाने के लिए व्याकरण को नए सिरे से लिखना होगा और उसे मनवाना भी पड़ेगा। भाषा अपना मार्ग स्वयं बनाती है, दम्पती का आग्रह व्यर्थ है।

यह तर्क दिया जा सकता है कि दम्पती तत्सम शब्द है और तत्सम को उसी रूप में रहने दिया जाता है। जी हाँ, दम्पती तत्सम है, अब यदि सब तत्सम उसी रूप में रहने दिए जाएँ या रहने दिए गए होते तो तद्भव रूप कैसे बनते? तत्सम से बिगड़ कर ही तो तद्भव बनते हैं। इसलिए छेड़छाड़ न करने, वैसे ही बना रहने देने का तर्क टिकता नहीं है। और फिर यह पक्षपात हम दम्पती के लिए ही क्यों कर रहे हैं? संस्कृत में अनेक शब्द हैं जो एकशेष के रूप में स्वीकार हैं। जैसे:-

- देवः च देवी च – देवौ।

- हंसः च हंसिनी च-- हंसौ

- अश्वः च अश्वा च – अश्वौ।

- वृद्ध: च वृद्धा च – वृद्धौ

- गायकः च गायिका च – गायकौ

- नर्तकः च नर्तकी च – नर्तकौ

- पुत्रः च पुत्री च – पुत्रौ

क्या हम इनमें से किसी अन्य को भी हिन्दी में ले रहे हैं? केवल एक शब्द के लिए हिन्दी से छेड़छाड़ भी अक्षम्य होनी चाहिए।

एक बात और। मान भी लें कि दम्पती तत्सम होने से उसे ही स्वीकार करना चाहिए क्योंकि वह पति का द्विवचन है, तो [कवि](https://xn--l1b6a9di5a0j.xn--h2brj9c/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%80/%E0%A4%B6%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%A6/%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BF/) शब्द भी तो तत्सम है और पति की भाँति ही उसकी रूपरचना होती है। दो कवियों के लिए हम **कवी** क्यों नहीं कहते?

स्पष्ट है कि शब्द चाहे संस्कृत के हों, नियम हिन्दी में प्रयोग से स्थिर होंगे और उन पर हिन्दी के व्याकरण नियम ही लगेंगे।
