राजनीति

संविधान और 'मैं' से 'हम'

राजनीति एक दिलचस्प चीज है। ये सब में है, सबकी है और सबसे है। इसके बावजूद अक्सर ये ताने सुनती है। गुनाह हम बुनते हैं, इल्जाम राजनीति पर आ चिपटता है। जैसे ही ‘मैं’, ‘हम’ में तब्दील होता है, राजनीति का क्षेत्र शुरू हो जाता है। यूपी-बिहार में ‘मैं’ कम ‘हम’ ज्यादा बोला जाता है,
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मोदी विरोध की अंतर्कथा

“मोदी से कुछ लोग इस हद तक घृणा करते हैं कि इस असंगत घृणा की वजह से कई सारे राजनैतिक विश्लेषक अपनी निष्पक्षता/वस्तुनिस्ठता खो रहे हैं। उनको (मोदी को) घुटनों पर देखने के उतावलेपन में वे अर्थहीन शब्दों में अर्थ खोजते हैं” मेरे एक पत्रकार मित्र, जिन्हें मैं बहत लंबे समय से जनता हूँ, ने
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यूपी में जाति और मतों का चक्रव्यूह

–शिवांगिनी पाठक (@ShivanginiPatha) गुजरने वाला समय मानव के सही या गलत, अच्छे या बुरे विचारों में निरंतर परिवर्तन का साक्षी रहा है: चक्रवर्ती राजगोपालाचारी युद्ध की आधुनिक परिभाषा में अब कुरुक्षेत्र युद्ध जैसा कुछ भी शेष नहीं रह गया है जहां देवदूत धर्म की प्रतिष्ठा, रक्षा की ख़ातिर राक्षसों को ललकारते थे। जहां युद्ध की
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