किसान और कृषि के नज़रिए से 500 और 1000 के नोट

–केदार सिरोही  (@KedarSirohi) सैद्धांतिक रूप से यह बात सही लगती है कि पुराने नोट हटाकर आप नए नोट चलन में लाएं तो अर्थव्यवस्था से कालाधन निकाल सकते हैं लेकिन हिंदुस्तान एक जटिल अर्थव्यवस्था है जहां छोटे कारोबारी हैं, गांव में किसान और मजदूर लोग हैं, उनका क्या होगा. बैंकिंग व्यवस्था बेहद कमजोर है जिसके कारण 
Read More

यूपी में जाति और मतों का चक्रव्यूह

–शिवांगिनी पाठक (@ShivanginiPatha) गुजरने वाला समय मानव के सही या गलत, अच्छे या बुरे विचारों में निरंतर परिवर्तन का साक्षी रहा है: चक्रवर्ती राजगोपालाचारी युद्ध की आधुनिक परिभाषा में अब कुरुक्षेत्र युद्ध जैसा कुछ भी शेष नहीं रह गया है जहां देवदूत धर्म की प्रतिष्ठा, रक्षा की ख़ातिर राक्षसों को ललकारते थे। जहां युद्ध की
Read More

जेएनयू में उदारता का मुखौटा लगाए है वामपंथ

  विश्वविद्यालय के वर्तमान घटनाक्रम ने “लाल आतंक” के चेहरे को उजागर किया है योगेंद्र भारद्वाज आज जेएनयू  (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय) का माहौल लगातार कुछ शरारती तत्त्वों के द्वारा बिगाडने की कोशिश की जा रही है और साथ ही बदनाम करने की भी कोशिश में कुछ लोग लगे हुये हैं, जो वास्तव में निन्दनीय है।14 अक्तूबर
Read More

बलूचिस्तान के ऐतिहासिक संदर्भ और उसके संघर्ष के मायनों को समझिए: मज़दाक दिलशाद बलूच

एक लंबे अरसे से अपनी आज़ादी के लिए संघर्ष कर रहे बलूचिस्तान और इसके लोगों में उस समय एक नई ऊर्जा का संचार हो गया जब इस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बलूचिस्तान की जनता को धन्यवाद दिया. एक राष्ट्र के तौर पर बलूचिस्तान पाकिस्तान से अलग
Read More

मेरी आपबीती: इस्लामिक स्टेट के चंगुल से निकलीं नादिया मुराद

‘नादिया मुराद बासी ताहा’ इराक़ के उत्तरी इलाके में बसे सिंजार की मूल निवासी हैं. नादिया मुराद की कहानी अपने आप में एक उदाहरण है उन लोगों के लिए जिन्होंने सब कुछ खोने के बाद भी संघर्ष करना नहीं छोड़ा. अगस्त 2014 में इस्लामिक स्टेट द्वारा बंधक बनाई गईं नादिया अदम्य साहस दिखाते हुए आज
Read More

अमेरिकी चुनाव की अक्कड़-बक्कड़

–यशवंत देशमुख (@YRDeshmukh) तो इस प्रकार डोनाल्ड ने अपना ‘प्राइमरी’ चुनाव जीत लिया है. क्या कहा? हिलेरी क्लिंटन भी चुनाव जीत गई हैं? ठीक है. समझ गया. दोनों चुनाव जीत गए हैं. लेकिन कैसे? दोनों चुनाव जीत जाएं, ये कैसे संभव है? अरे भैया… चुनाव तो कोई एक ही जीत सकता है न? अगर दोनों
Read More

राज्यसभा चुनावों की अक्कड़-बक्कड़

–यशवंत देशमुख (@YRDeshmukh) हमने अपनी लोकतांत्रिक प्रणाली इंग्लैंड की ‘वेस्टमिंस्टर’ मॉडल पर चुनी है जिसमें निचले सदन यानी लोकसभा का चुनाव “फर्स्ट पास्ट द पोस्ट” की प्रक्रिया के तहत होता है. इस प्रणाली में जो सबसे ज्यादा वोट पाता है वही सिकंदर कहलाता है. अपने प्रतिनिधियों को चुनने को यह तरीका दुनिया में सबसे सरल
Read More

जलता उत्तराखण्ड

–डॉ. अनिल प्रकाश जोशी एक बार फिर जंगल की आग ने उत्तराखण्ड को बड़ी मार कर दी। जंगल तो खाक हुए ही हुए हैं पर अबकी बार आग बुझाने में कई स्थानीय लोगो की भी बलि चढ़ गयी। इस बार की आग मात्र जगलों के लिए ही भारी नहीं पड़ी बल्कि अबकी बार दावानल (जंगल
Read More

गांधी का आज का चंपारण

–विश्वजीत मुखर्जी इस साल गणतंत्र दिवस की परेड में राजपथ पर बिहार की झांकी काफी अलग और आकर्षक दिख रही थी। झांकी में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का वह अध्याय दर्शाया गया जिसने मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा बना दिया। मैं बात कर रहा हूं चंपारण सत्याग्रह की। अंग्रेज़ों द्वारा नील किसानों पर जबरन
Read More

न्यायालयों में लंबित मामलेः न्यायपालिका को आत्मावलोकन की जरूरत

–ब्रजकिशोर शर्मा मुख्यमंत्री और न्यायाधीशों के सम्मेलन में मुख्य न्यायमूर्ति ने जिस तरह काम के दवाब की चर्चा की और न्यायाधीशों की कम संख्या पर प्रधानमंत्री से इसके लिए भावनात्मक अपील की, उससे लगता है कि न्यायपालिका में इस समय सबसे बड़ी समस्या न्यायाधीशों की कम संख्या को लेकर ही है. न्यायाधीशों की संख्या कम
Read More