विजय दिवस और बांग्लादेश का आगमन

-शान कश्यप (@Shaan_Kashyapp) इस 16 दिसम्बर को हम 1971 के युद्ध की 45वीं जयंती मना रहे हैं. इसे विजय दिवस कहने का अभिप्राय मात्र एक युद्ध विजय से नहीं है, बल्कि यह इस युद्ध के ऐतिहासिक महत्व को इंगित करता है। मानव इतिहास एक तरह से युद्धों का इतिहास भी रहा है- वर्चस्व, विस्तार, साम्राज्य
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नोटबंदी-50 दिनों की उम्मीद

–यशवंत देशमुख (@YRDeshmukh)                                          सी-वोटर का विस्तृत सर्वेक्षण नोटबंदी पर आम नागरिकों को होने वाली परेशानियों के बीच सी-वोटर ट्रैकर के हिसाब से विमुद्रीकरण का समर्थन तीसरे हफ्ते भी जारी है। इसके समर्थन में 85.77 फीसदी
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पोस्ट ट्रुथ-सच हुआ बेमतलब!

–सत्येंद्र रंजन (@SRanjan19)                       ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने Post-Truth को 2016 का वर्ड ऑफ द ईयर चुना है हाल ही में ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने “post-truth” को 2016 का वर्ड ऑफ द ईयर यानी साल का सबसे प्रचलित शब्द घोषित किया। इस शब्दकोश के संपादकों के मुताबिक
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लोगों के दिलों पर राज करती थीं जयललिता

-संजय मेहता (@JournalistMehta)   आज के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में राजनीतिक दलों एवं नेताओं पर लोगों का अविश्वास बढ़ा है। अविश्वास के इस दौर में ऐसे बहुत कम नेता हुए जिन्होंने लोगों के दिलो को जीता। जयललिता के समर्थक जान देने को तैयार रहते थे। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि
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विलोम का विराट बन जाना

-सत्येंद्र रंजन  (@SRanjan19) ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो जयललिता जयराम द्रविड़ राजनीति का विलोम थीं। बीसवीं सदी के आरंभ के साथ आगे बढ़े द्रविड़ आंदोलन का मूल स्वर ब्राह्मणवाद विरोधी था। इसने हिंदी विरोधी तेवर अपनाया। तमिल भाषा और संस्कृति के गौरव पर जोर दिया। ई.वी. रामास्वामी नायकर पेरियार, सी.एन, अन्ना दुरै, एम करुणानिधि और
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समान नागरिक संहिता का ब्लू प्रिंट

—तुफैल अहमद (@TufailElif)) भारतीय संविधान का अनुच्छेद 44 सरकारों को निर्देश देता है “राज्य अपनी सीमा में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून बनाएगा” लेकिन संविधान लागू होने, यानि 26 जनवरी 1950 से लेकर आज तक किसी भी राजनैतिक पार्टी ने अल्पसंख्यकों खासकर मुस्लिम वोट छिटकने के डर से समान नागरिक संहिता
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रेल हादसों की तमाम जांच रिर्पोटों से क्या हासिल होगा?

– संजय मेहता (@JournalistMehta) हमारे देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक परिवहन सेवा भारतीय रेलवे है। लाखों – करोड़ों लोग प्रत्येक दिन इससे सफर करते हैं। इतनी बड़ी जिम्मेवारी के बावजूद भी यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भारतीय रेलवे गंभीर नहीं नजर आता। बार – बार हादसे हो रहे हैं। हम लगातार एक ही गलती की
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नोटबंदी के साथ कुछ और कदम उठाए सरकार

– शशांक पाठक (@_ShashankPathak) नोट बंदी के फैसले के बाद से अब तक जो भी ख़बरें आईं हैं वे सब दो तरह की तस्वीरें बयां कर रही हैं। हालांकि प्रधानमंत्री ने देशवासियों से पचास दिन का समय मांगा है, साथ मांगा है और जब देश के प्रधानमंत्री ऐसा कहें तो उनके फैसले पर भरोसा करना
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कृषि पर कर से किसानों की आय हो सकती है दोगुनी

–केदार सिरोही  (@KedarSirohi) “कार्पोरेट के किसान खेती से होने वाली आय की आड़ में कालेधन की फसल को सफ़ेद धन की उपज बना रहे हैं।” “आयकर 1961 के सेक्शन 10 (1) में कृषि आय को छूट दी गई है जिसके कारण कुछ लोग 10 नंबर की आय को 1 नंबर में कर रहे है” देश
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चर्चा के चबूतरे पर अन्ना हजारे

अन्ना जी आपके जीवन पर अब एक पूरी फिल्म आ चुकी है. कभी आपने (संघर्ष के आरंभिक दिनों में) सोचा था कि आपका जीवन एक दिन इतना महत्वपूर्ण और दूसरों के लिए प्रेरणादायी हो जाएगा जो पूरी फिल्म बन जाए? नहीं मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरे जीवन पर फिल्म बनेगी. एक
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