भारत का भविष्य: एक खोज (दूसरी किस्त)

–पर्णिया मिश्रा ‘सुवास’ (@parniyamishra) पिछले लेख में मैने भारत के उज्जवल भविष्य के साध्य के साधन के रूप में ज्ञान के महत्व को प्रस्तुत किया था। आज प्रश्न यही खड़ा होता है कि यह विचारधारा और संकल्पना आज के भारत में कहाँ तक प्रासंगिक है? जिस महान और विकसित ज्ञान परंपरा का निर्वाह इस भारत
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विक्रम-बेताल: भाजपा यशस्वी क्यों है?

पिछली कड़ी में अनिवार्य मतदान एक कर्त्तव्य हो या नहीं, इस बात का राजा विक्रम सही जवाब दे देते हैं और शर्त के अनुसार बेताल पुन: पेड़ पर लटक जाता है। हर बार की तरह राजा ने भी हार नहीं मानी, और उसे पेड़ से उतार कर अपने कंधों पर लाद कर मंदिर की तरफ
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अलेप्पो से आए 'आख़िरी संदेश' जो कभी 'आख़िरी' थे ही नहीं

– अमन गुप्ता (@amanalbelaa) इन दिनों सीरिया के शहर अलेप्पो की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। सरकारी सेना और विद्रोहियों के बीच आम नागरिक की जिंदगी ख़तरे में हैं। भारी बमबारी में बड़ी बड़ी इमारतें जमींदोज़ हो गईं। लाखों लोग मर रहे हैं। हर तरफ चीख पुकार है और लाशों का ढेर लगा हुआ
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भारत का भविष्य: एक खोज

–पर्णिया मिश्रा ‘सुवास’ (@parniyamishra) आज भारत को विश्वगुरु बनाने की चर्चाएं ज़ोरों पर हैं। राजनीती से लेकर व्यावसायिक क्षेत्र तक, गाँव-क़स्बे से लेकर हर जगह, बस हिंदुस्तान के भविष्य की चर्चा है। अच्छा है। लेकिन उसका रास्ता क्या होगा? इस प्रश्न में लोगों की सोच बंटी हुई है। आज से लगभग 15 साल पहले भारत
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चुनाव: बहिष्कार से विकास की आस

__अमित (AmitBharteey) अगर आपकी राजनीति में रुचि हैं और इससे संबंधित ठीक-ठाक सामग्री पढ़ते रहते हैं तो आपने कई विद्वानों को ये कहते पाया होगा कि गरीबों का, अंतिम-जन का सबसे आख़िरी और कारगर उपाय उसका अपना मत होता है। जब चुनी गईं सरकारें और प्रतिनिधि पाँच साल (या निर्धारित कार्यकाल) में उसकी अपेक्षाओं के
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चर्चा के चबूतरे पर केशव प्रसाद मौर्य

कहा जाता है कि दिल्ली की सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है. उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा राजनीतिक प्रदेश है. लोकसभा की सबसे ज्यादा 80 तो वहीं विधानसभा की 403 सीटें… लेकिन पिछले करीब 15 सालों से देश ही नहीं बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी होने का दावा करने
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...जो बापू को 'गढ़' रहे हैं

आज महात्मा गांधी की पुण्यतिथि है। भले ही साबरमती का संत 69 साल पहले पंचतत्व में विलीन हो गया हो, लेकिन उनका सत्य और अहिंसा का सिद्धान्त आज भी दुनिया को रास्ता दिखा रहा है। गांधी जी की पुण्यतिथि पर हम आपको एक ऐसे शख्स से मिलवा रहे हैं जो बापू को ‘गढ़’ रहे हैं
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विक्रम-बेताल: अनिवार्य मतदान एक कर्त्तव्य हो या नहीं?

विक्रम और बेताल की कहानियां हम सबने सुनी हैं। इस कथा के अनुसार राजा विक्रमादित्य एक तांत्रिक की इच्छा पूर्ण करने के लिए एक पेड़ पर लटके हुए बेताल को पकड़ने की जिम्मेदारी लेते हैं। बेताल राजा के सामने एक शर्त रखता है। वह राजा से एक सवाल पूछेगा। अगर राजा उसका जवाब जानते हुए
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केरल का लाल आतंक

भारत के सर्वाधिक साक्षर राज्य का दर्जा केरल को प्राप्त है। भारत की साक्षरता दर जहाँ 74 के आसपास है, वहीं केरल में यही 92 तक जाती है। गर्व होता है भारत को अपना ऐसे साक्षर राज्य पर। साथ ही केरल की नर्सें, जो कि विश्वविख्यात हैं और संंभवतः भारत में लगभग प्रत्येक राज्य में
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जयंती विशेष-14 साल में 'राज' की राइफ़लों से भरी बैलगाड़ी लूटने वाले 'लम्बोदर मुखर्जी'

ज़िंदगी में स्वतंत्रता सबसे महत्वपूर्ण होती है या यूँ कह लें, स्वाधीनता जीवन का मूल अर्थ है। मगर हमारे देश का इतिहास दो सौ सालों की पराधीन दासता को बयां करता है। साल 1947 में हमारा भारत देश दो सदियों की गुलामी की जंजीरों से आज़ाद हुआ। उस वर्ष 15 अगस्त वह दिन था जब
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