दुनिया/World

वैश्विक आतंकवाद: एक लाइलाज बीमारी

– योगेन्द्र भारद्वाज विश्व के महापुरुषों ने अपनी अपनी संस्कृति को सर्वोत्कृष्ट रखने का प्रयत्न किया था, जिसमें भारत ने विश्वगुरू की उपाधि भी धारण की। लेकिन आज समग्र जगत एक ऐसी बीमारी का शिकार हो रहा है, जिसकी समाप्ति अत्यन्त दुष्कर है। यह बीमारी लाइलाज है और वैश्विक महामारी का रूप ले चुकी है।
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अलेप्पो से आए 'आख़िरी संदेश' जो कभी 'आख़िरी' थे ही नहीं

– अमन गुप्ता (@amanalbelaa) इन दिनों सीरिया के शहर अलेप्पो की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। सरकारी सेना और विद्रोहियों के बीच आम नागरिक की जिंदगी ख़तरे में हैं। भारी बमबारी में बड़ी बड़ी इमारतें जमींदोज़ हो गईं। लाखों लोग मर रहे हैं। हर तरफ चीख पुकार है और लाशों का ढेर लगा हुआ
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विजय दिवस और बांग्लादेश का आगमन

-शान कश्यप (@Shaan_Kashyapp) इस 16 दिसम्बर को हम 1971 के युद्ध की 45वीं जयंती मना रहे हैं. इसे विजय दिवस कहने का अभिप्राय मात्र एक युद्ध विजय से नहीं है, बल्कि यह इस युद्ध के ऐतिहासिक महत्व को इंगित करता है। मानव इतिहास एक तरह से युद्धों का इतिहास भी रहा है- वर्चस्व, विस्तार, साम्राज्य
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पोस्ट ट्रुथ-सच हुआ बेमतलब!

–सत्येंद्र रंजन (@SRanjan19)                       ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने Post-Truth को 2016 का वर्ड ऑफ द ईयर चुना है हाल ही में ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने “post-truth” को 2016 का वर्ड ऑफ द ईयर यानी साल का सबसे प्रचलित शब्द घोषित किया। इस शब्दकोश के संपादकों के मुताबिक
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बलूचिस्तान के ऐतिहासिक संदर्भ और उसके संघर्ष के मायनों को समझिए: मज़दाक दिलशाद बलूच

एक लंबे अरसे से अपनी आज़ादी के लिए संघर्ष कर रहे बलूचिस्तान और इसके लोगों में उस समय एक नई ऊर्जा का संचार हो गया जब इस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बलूचिस्तान की जनता को धन्यवाद दिया. एक राष्ट्र के तौर पर बलूचिस्तान पाकिस्तान से अलग
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अमेरिकी चुनाव की अक्कड़-बक्कड़

–यशवंत देशमुख (@YRDeshmukh) तो इस प्रकार डोनाल्ड ने अपना ‘प्राइमरी’ चुनाव जीत लिया है. क्या कहा? हिलेरी क्लिंटन भी चुनाव जीत गई हैं? ठीक है. समझ गया. दोनों चुनाव जीत गए हैं. लेकिन कैसे? दोनों चुनाव जीत जाएं, ये कैसे संभव है? अरे भैया… चुनाव तो कोई एक ही जीत सकता है न? अगर दोनों
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