विविध/Miscellaneous

प्रेम और उसका बदलता स्वरूप

प्रेम क्या है? इसके लक्षण क्या हैं? कैसे होता है? कैसे फैलता है? इन प्रश्नों के उत्तर खोजने और देने में ना जाने कितने चिन्तक, विचारक, दार्शनिक शहीद हो गए। लेकिन आजतक प्रेम, उसके लक्षण और गुणों का कोई परिष्कृत और परिभाषित अर्थ लोगों के सामने नहीं आया है। उसके बाद भी हम सभी हजारों-लाखो
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वामसी जुलुरी द्वारा लिखित 'हिंदू धर्म' की पुस्तक समीक्षा: एक पुस्तक जो पूरी ना पढ़ी जा सकी

वामसी जुलुरी ने ‘रिआर्मिंग हिंदुइज़्म’ नाम की एक पुस्तक लिखी है। सुशांत झा ने हिंदी अनुवाद किया है, ‘हिंदू धर्म-वास्तविक स्वरूप, हिंदूफोबिया और विश्व कल्याण’ नाम से। भ्रम न हो इसलिए पहले ही स्पष्ट कर दें कि यह पुस्तक हिंदुओं को संकट का हथियारों से मुक़ाबला करने का प्रस्ताव नहीं करती। शायद! फिर क्या है
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Book Review of WHY I AM A HINDU: It is natural work from intellectual faith of a true Hindu

“As most of them are trying to assert and make others believe that through this clever piece of craftsmanship congress is making efforts to hold ground and root itself in the awakened Hindu identity of India. I would say these are the comments from people who didn’t go beyond the cover page of the book…..” I
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गिरवी इतिहास का परिणाम है कोरेगांव हिंसा

कुछ सौ एक साल पहले की घटना है। एक गाँव में राम और श्याम नाम के दो लोग रहते थे। उनके घर-बार साथ ही साथ थे। उनका घर परिवार बहुत संपन्न तो नहीं लेकिन सुखी था। एक दिन उस गाँव में एक अंग्रेज आया और उसने राम से कहा की श्याम के दादाजी के दादाजी,
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जन्मदिन विशेष: जब ग़ालिब और ज़ौक़ भरी महफ़िल में लड़ पड़े

“हैं और भी दुनिया में सुखन-वर बहुत अच्छे, कहते हैं कि ग़ालिब का है अंदाज-ए-बयाँ और” ।।  आज मिर्ज़ा असदुल्लाह बेग़ खां यानी मिर्ज़ा ग़ालिब की जयंती है। अपने ज़ुदा अंदाज-ए-बयाँ- के लिए मशहूर मिर्ज़ा ग़ालिब को भला शेरो-शायरी का कौन कद्रदान नहीं जानता होगा। और तभी तो ख़ुद ग़ालिब ने लिखा है – “पूछते
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जन्मदिन विशेष: जो नेहरु जी ने 1947 में किया, वह अटल जी ने 1984 में किया

कुछ याद करने की कोशिश कीजिए। विभाजन की एक तस्वीर… जवाहर लाल नेहरु ‘प्रधानमंत्री’ जवाहर लाल नेहरु हो चुके थे। देश रक्तरंजित विभाजन की पीड़ा सह रहा था। धर्म के नाम पर होने वाली हिंसा में दोनों ओर लोग कट-मर रहे थे। राजधानी होते हुए, दिल्ली इससे प्रभावित ना हो, ऐसा नहीं हो सकता था।
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नेताजींची जयंती ‘देशभक्त दिन’ घोषित करा, चंद्रकुमार यांचे पंतप्रधानांना पत्र

श्री नरेंद्र मोदी माननीय पंतप्रधान नवी दिल्ली महोद्य, मी तुम्हाला राष्ट्रीय विषयावर आधारित एका महत्त्वाच्या विषयावर आणि आपल्या देशातील जनतेच्या खूप आधीपासून प्रलंबित असलेल्या एका मागणी विषयी पत्र लिहीत आहे। एनडीए सरकारने जर 23 जानेवारी ज्या दिवशी नेताजी सुभाषचंद्र बोस यांची जयंती असते हा दिवस ‘देशभक्त दिन’ किंवा ‘देशप्रेम दिन’ म्हणून घोषित केला, तर जनतेला
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प्रधानमंत्री को पत्र: नेताजी के जन्मदिन को 'देश प्रेम दिवस' घोषित कीजिए

श्री नरेंद्र मोदी माननीय प्रधानमंत्री नई दिल्ली आदरणीय नरेंद्र मोदी जी,      मैं आपको यह पत्र एक ऐसे विषय के बारे में लिख रहा हूँ जो ना सिर्फ राष्ट्रीय महत्व का है बल्कि यह भारत के लोगों की बहुत पुरानी मांग भी है। देश के लोग बहुत खुश होंगे अगर राजग (एनडीए) सरकार सुभाष
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भोपाल गैस त्रासदी: गोरखपुर एक्सप्रेस, जो स्टेशन पर नहीं रुकी

यह कहानी भोपाल गैस त्रासदी के समय भोपाल रेलवे स्टेशन पर आने वाली गोरखपुर एक्सप्रेस की है, जो लाशों से पटे भोपाल स्टेशन की तरफ बढ़ रही थी। पूरा स्टेशन मिथाइल आइसोसाइनाइट गैस की चपेट में आ चुका था, ऐसे में अगर ट्रेन स्टेशन पर रुकती तो मृतकों की संख्या में निश्चित इज़ाफ़ा होता। ऐसी
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दारुल उलूम की यह चाबुक यानि इस्लाम पर भीतरघात

न्यूज वेबसाइट सत्याग्रह डीएनए की एक खबर के हवाले से लिखता है कि दारुल उलूम देवबंद ने कांग्रेस नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद को इस्लाम से बाहर कर दिया है। आरोप है कि उन्होंने यूपी के संभल में आयोजित कल्कि महोत्सव में हिंदुओं के आराध्य भगवान राम की आरती की थी। देवबंद के
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