…जो बापू को ‘गढ़’ रहे हैं

आज महात्मा गांधी की पुण्यतिथि है। भले ही साबरमती का संत 69 साल पहले पंचतत्व में विलीन हो गया हो, लेकिन उनका सत्य और अहिंसा का सिद्धान्त आज भी दुनिया को रास्ता दिखा रहा है। गांधी जी की पुण्यतिथि पर हम आपको एक ऐसे शख्स से मिलवा रहे हैं जो बापू को ‘गढ़’ रहे हैं और उनकी बनाई बापू की प्रतिमा संसद भवन समेत दुनिया के 300 से अधिक देशों में लग चुकी हैं। यह शख्स हैं विख्यात शिल्पकार व पद्म भूषण से अलंकृत राम वी. सुतार!

मूल रूप से महाराष्ट्र के छोटे से गांव गोंदूर के रहने वाले राम वी. सुतार बचपन में महात्मा गांधी से इस कदर प्रभावित हुए कि राष्ट्रपिता की काया जेहन में बस गई। पिता कारपेंटर थे। इस वजह से शिल्पकारी विरासत में मिली थी। किसी तरह मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की और ग्यारहवीं में दाखिला लिया। उसी दौरान पता चला कि गांव से थोड़ी दूर स्थित धुले में एक शिल्पकार हैं जो पत्थर की मूर्ति में जान डाल देते हैं। राम वी. सुतार अगले ही दिन श्रीराम कृष्ण जोशी के पास पहुंच गए। ग्यारहवीं की पढ़ाई के साथ-साथ शिल्पकारी सीखने लगे। WhatsApp Image 2017-01-29 at 1.36.28 PM

100 रुपये में गढ़ी पहली प्रतिमा
राम वी. सुतार ने अपनी कला से श्रीराम कृष्ण जोशी का दिल जीत लिया। एक दिन गुरु यानी श्रीराम कृष्ण जोशी ने राम वी. सुतार को सौ रुपये दिया और कहा कि इन पैसों से महात्मा गांधी की प्रतिमा बनाएं। उन्होंने सीमेंट पर महात्मा गांधी की प्रतिमा हूबहू बना दी। फिर एक सहपाठी के लिए दूसरी प्रतिमा बनाई। राम वी. सुतार ने महात्मा गांधी की तीसरी प्रतिमा अपने स्कूल के लिए बनाई, जहां से पांचवीं की पढ़ाई की थी। स्कूल ने उन्हें तीन सौ रुपये प्रदान किया।

संसद भवन परिसर के लिए बनाई प्रतिमा
जेजे स्कूल ऑफ आर्ट से पढ़ाई पूरी करने और कुछ दिनों की नौकरी के बाद वर्ष 1958 में राम वी. सुतार दिल्ली आ गए। उस समय इंडिया गेट के पास बनी कैनोपी में किंग जार्ज पंचम की प्रतिमा लगी थी। विरोध के बाद कैनोपी से इस प्रतिमा को हटा दिया गया। बाद में यहां महात्मा गांधी की प्रतिमा लगाने की बात चली। राम वी. सुतार ने खुद इस कैनोपी के लिए महात्मा गांधी की एक प्रतिमा तैयार की। इस प्रतिमा में महात्मा गांधी दो बच्चों के साथ खड़े थे। पर बाद में तत्कालीन सरकार ने तय किया कि कैनोपी में राष्ट्रपिता की ध्यान के मुद्रा में प्रतिमा लगेगी। जिसके लिए एक प्रतियोगिता हुई और राम वी. सुतार की डिजाइन को पंसद किया गया। हालांकि यह विचार भी मूर्त रूप नहीं ले पाया। बाद में राम वी. सुतार ने संसद भवन परिसर के लिए इसी मुद्रा में महात्मा गांधी की प्रतिमा गढ़ी। 17 फिट उंची यह प्रतिमा प्रेरणा का स्रोत है।

..और जलानी पड़ी पसंदीदा टोपी
राम वी. सुतार जब सिर्फ सात साल के थे उस समय उनके गाँव में विदेशी कपड़े जलाए जा रहे थे। जिसमें महात्मा गांधी खुद आए थे।  राम वी. सुतार बताते हैं कि जब विदेशी कपड़े जल रहे थे मैं भी कौतुक वश वहां चला गया। उस समय मेरे पास मखमल की एक गोल टोपी थी, जिसे मैं लगाए हुए था। भीड़ में किसी ने कहा कि अरे यह भी विदेशी है और मुझे उस टोपी को आग के हवाले करनी पड़ा। यह पहला मौका था जब मैनें महात्मा गांधी को नजदीक से देखा और सुना था। यही प्रेरणा की वजह बनी।

राष्ट्रपिता की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाने की चाहत
91 वर्षीय राम वी. सुतार की तमन्ना महात्मा गांधी की विश्व की सबसे उंची प्रतिमा बनाने की है। उन्होंने बाकायदा इसकी डिजाइन भी तैयार कर रखी है। वह कहते हैं कि मैनें इसके लिए महाराष्ट्र के कई नामी उद्यमियों से बात भी की थी। पर कई लोगों ने महात्मा गांधी की जगह शिवाजी की प्रतिमा बनाने की मांग की। जिसकी वजह से यह विचार मूर्त रूप नहीं ले पाया है। राम वी. सुतार कहते हैं कि मेरी ख्वाहिश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर अपने इस विचार को साझा करने की है ताकि राष्ट्रपिता की प्रतिमा बनाई जा सके।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और शिवाजी की प्रतिमा बना रहे हैं
राम वी. सुतार ने महात्मा गांधी की प्रतिमा तो बनाई ही है। साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, पंडित दीन दयाल उपाध्याय, रफी अहमद किदवई आदि नेताओं की मूर्तियों में भी जान डाली है। इस समय वह मुंबई के समुंदर में लगने वाली विश्व की सबसे ऊंची शिवाजी की प्रतिमा को तैयार करने में लगे हैं। इसके अलावा वह सरदार वल्लभभाई पटेल की विश्व की दूसरी सबसे उंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को तैयार करने में लगे हैं। उनकी निगरानी में चीन में इस प्रतिमा की कास्टिंग हो रही है।

भारत में यहां लगी है प्रतिमा :
संसद भवन परिसर, दिल्ली
गांधी मैदान, पटना
कर्नाटक विधानसभा, बंगलौर

विदेश : 
ऑस्ट्रेलिया
ब्रिटेन
स्पेन
जर्मनी
तजाकिस्तान आदि।
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