चर्चा के चबूतरे पर केशव प्रसाद मौर्य

कहा जाता है कि दिल्ली की सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है. उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा राजनीतिक प्रदेश है. लोकसभा की सबसे ज्यादा 80 तो वहीं विधानसभा की 403 सीटें… लेकिन पिछले करीब 15 सालों से देश ही नहीं बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी होने का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी यहाँ सत्ता से बाहर है। साल 2012 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव भाजपा ने 398 सीटों पर चुनाव लड़ा और 351 सीटों पर वो चुनाव हार गई। पार्टी को सिर्फ 15 फीसदी वोट मिले और महज़ 47 सीटें मिलीं। लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में राजग (एनडीए) ने यहां से कुल 73 सीटें जीती। जिसमें से 71 भाजपा की और 2 सीटें अपना दल की थीं। इन चुवावों में भाजपा को करीब 42 फीसदी वोट उत्तर प्रदेश में मिले थे।
उत्तर प्रदेश में भाजपा की चुनावी रणनीति और भाजपा के घोषणापत्र पर हमारे सहयोगी पंकज कुमार ने उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य  से  ‘चौपाल’ पर चर्चा की… वैसे केशव प्रसाद मौर्य और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में एक बात कॉमन है- वो ये कि दोनों ने ही बचपन में चाय बेची है! एक समय देश के पहले प्रधानमंत्री प.नेहरु जिस सीट से चुनकर संसद आते थे, आज उसी फूलपुर सीट केशव प्रसाद मौर्य लोकसभा सांसद हैं।

जनता आपको वोट क्यों दे? वो कांग्रेस के पास क्यों न जाए? उन्होंने मायावती को देखा है, मुलायम को भी देखा है, सपा की सरकार है, अखिलेश को भी देखा है। आपको वोट क्यों दे?
WhatsApp Image 2017-02-02 at 5.33.48 PMसबको देखा बार-बार हमको देखो अबकी बार…. सपा को देख चुके हो, बसपा को लोग देख चुके हैं और 10 वर्षों तक लोग कांग्रेस को केंद्र में देख चुके हैं। सपा-बसपा की बैसाखी पर कांग्रेस टिकी हुई है और सपा और बसपा की बैसाखी पर कांग्रेस ने 12 लाख करोड़ का घोटाला किया है। इसलिए इनको भी देख चुके हैं। बसपा की सरकार भी कई बार उत्तर प्रदेश में लोग देख चुके हैं। इस समय भाजपा के पक्ष में लोग इसलिए खड़े हैं क्योंकि उत्तर प्रदेश में गुंडागर्दी खत्म करने का काम कोई कर सकता है तो वो भाजपा ही कर सकती है। भ्रष्टाचार ख़त्म करने का काम कोई कर सकता है तो भाजपा कर सकती है। जमीनों पर कब्जा रोकने का काम कोई कर सकता है, तो भाजपा कर सकती है। खनन माफियाओं पर लगाम लगाने का काम कोई कर सकता है, तो भाजपा कर सकती है। उत्तर प्रदेश का विकास करने का काम कोई कर सकता है. तो भाजपा कर सकती है। कानून व्यवस्था सुधारने का काम कोई कर सकता है, तो भाजपा कर सकती है। अन्नदाताओं के हितों की रक्षा अगर कोई पार्टी कर सकती है, तो भाजपा कर सकती है। युवाओं को रोजगार के अवसर देने का काम कोई कर सकता है, तो भाजपा कर सकती है। पूर्वांचल हो चाहें बुंदेलखंड हो या पश्चिम का कोई हिस्सा, इनके विकास का काम कोई कर सकता है, तो भाजपा कर सकती है। ये बात लोगों को समझ में आ चुकी है। इसलिए लोग भाजपा को वोट दे भी रहे हैं और लोग वोट दें, ऐसा मैं अपील करता हूँ।

उत्तर प्रदेश में दो प्रमुख पार्टियां हैं। एक सपा, जिसके पास एक चेहरा है अखिलेश, बसपा के पास एक चेहरा है मायावती, आपके पास मुख्यमंत्री पद का अभी तक कोई चेहरा नहीं है। आपको नहीं लगता, इससे नुकसान होगा?
भारतीय जनता पार्टी का हर कार्यकर्ता सीएम का चेहरा होता है, उनके पास अकाल है। भाजपा के पास कोई अकाल नहीं है। भाजपा के पास कई चेहरे हैं। उनके पास केवल एक चेहरा है। क्या अखिलेश यादव को हटाकर शिवपाल को चेहरा बनाएंगे? नहीं बनाएंगे, मायावती को हटाकर कोई दूसरा सीएम बनेगा, ऐसा संभव है क्या? वो बसपा में रह पाएगा क्या? वो एक व्यक्ति और एक परिवार की पार्टियां हैं। भारतीय जनता पार्टी सच्ची लोकतांत्रिक, विश्व की सबसे बड़ी पार्टी है। देश की सबसे बड़ी पार्टी है। राज्य की सबसे बड़ी पार्टी है। इसलिए ये कोई विषय नहीं है। चेहरा आता है, तब भी भाजपा जीतती है, चेहरा नहीं होता है तब भी भाजपा जीतती है। कई राज्यों में चुनाव हुए बिना चेहरे के जीते…

मान लीजिए भाजपा की सरकार बनती है या भाजपा पूर्ण बहुमत में आती है तो पार्टी आपको मुख्यमंत्री बनाएगी?
मैं किसी काल्पनिक प्रश्नों का उत्तर दूं, ये उचित नहीं है। ये भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय संसदीय बोर्ड तय करता है, किसे सीएम पद का चेहरा बनाना है या नहीं बनाना है। या तो विधायक दल तय करता है कि किसको बनाना है या किसको नहीं बनाना है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश का कोई नेता तय नहीं करता है कि किसको बनना है या किसको बनाना है। मेरे ऊपर तो प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते जिम्मेदारी है कि 300 से अधिक सीटें भाजपा के खाते में आएं।

कांग्रेस का नारा था ’27 साल यूपी बेहाल’ वो बदलकर हो गया ‘यूपी को ये साथ पसंद है’। बिहार में भी ऐसा ही हुआ लालू-नीतीश साथ आए और आप चुनाव बुरी तरह हार गए। उत्तर प्रदेश में दो बड़े दल, सपा और कांग्रेस साथ आ गए हैं… क्या आप जमीनी स्तर पर इतने मजबूत हैं कि आप इनका मुकाबला कर पाएं?
समाजवादी पार्टी का बहुत विज्ञापन आ रहा था। अखिलेश यादव जी का भाषण आ रहा था कि उन्होंने बहुत विकास किया है। अगर विकास किया है तो फिर बैसाखी की जरूरत क्यों पड़ी? उन्होंने विकास नहीं किया है। विकास उनका सिर्फ विज्ञापन पर है। जमीन पर कोई विकास नहीं हुआ है। गुंडई इतनी करवाई इन लोगों ने उत्तर प्रदेश में कि आम आदमी त्रस्त है। पुलिस और प्रशासन का दुरुपयोग इतना किया कि अधिकारी, सपा पदाधिकारी की तरह काम कर रहे हैं। और जनता की सुनने वाला कोई नहीं था। इसलिए लोग सपा को नकारने का मन बना चुके हैं। कांग्रेस का कोई वज़ूद नहीं। जहाँ तक मैं निष्कर्ष निकाल पाता हूँ, बहुत कोशिश करें तो शायद 1-2 सीट कांग्रेस की निकल जाए वरना कांग्रेस का खाता खुलने वाला नहीं। सपा के प्रति इतना गुस्सा है कि जिस दिन वोट पड़ेगा, वोटों की गिनती होगी, जो सोच नहीं सकते समाजवादी पार्टी का उतना बुरा प्रदर्शन होगा। मैं निष्कर्ष निकालकर कहता हूं कि अगर सपा-बसपा और कांग्रेस मिलकर भी लड़ें तो ये 50 सीट से ज्यादा नहीं जीत सकते हैं।

टिकट बंटवारे को लेकर ऐसी ख़बरें हैं कि भाजपा में घमासान मचा हुआ है। कुछ उदाहरण- बलिया के बांसडीह में विधानसभा में केतकी सिंह का टिकट काटकर ओम प्रकाश राजभर को टिकट दिया गया, जहाँ आपका गठबंधन है। फतेहपुर में आपने आदित्य पांडेय का टिकट काट दिया। ये सभी लोग कहीं दूसरी जगह से चुनाव लड़ने के बारे में सोच रहे हैं। ये आपके कार्यकर्ता रहे हैं। आपकी पार्टी में इन्होंने 2-4 साल का वक़्त दिया है। तो आपको नहीं लगता कि ये आपका खेल बिगाड़ेंगे?
जब बड़े स्तर पर बड़े निर्णय होते हैं और कुछ दलों से समझौते होंगे तो स्वाभाविक तौर पर कुछ सीटें जिनसे समझौते होंगे, उन्हें देना पड़ेगा और उसी चक्कर में कुछ सीटें देनी पड़ रही हैं। चाहे वो भारतीय समाज पार्टी हो या अपना दल हो… कुछ सीटों पर समस्या है। कहीं-कहीं कई दावेदार थे टिकट के… टिकट तो एक को ही मिलता है। बहुत लोगों को टिकट नहीं मिल पाएगा। इन सबके बावजूद जनता पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है। जिन कार्यकर्ताओं को टिकट नहीं मिल पाया है, जब सरकार बनेगी तो उन कार्यकर्ताओं के सम्मान को ध्यान में रखा जाएगा और उन्हें सम्मान दिया जाएगा। लेकिन जनता प्रभावित नहीं होने वाली है। जनता भाजपा के साथ खड़ी है।

ऐसी ख़बरें हैं कि योगी आदित्यनाथ पार्टी के बड़े नेताओं से नाराज़ हैं। जिसकी वजह टिकट बंटवारे को बताई जा रही है। हिंदू युवा वाहिनी ने कुशीनगर और महाराजगंज में अपने प्रत्याशी भी घोषित कर दिया। ये हिंदू युवा वाहिनी वही संगठन है जिसकी स्थापना योगी आदित्यनाथ ने की थी। आपको नहीं लगता कि योगी आदित्यनाथ के समर्थक इन सीटों पर भाजपा का खेल खराब कर सकते हैं?
महाराज जी के नाराज़ होने की खबरें काल्पनिक है। महाराज जी टिकट बंटवारे की पूरी प्रक्रिया में शामिल थे। सब लोगों ने बैठकर सर्वे रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लिया। महाराज जी पश्चिम उत्तर प्रदेश में प्रचार कर रहे हैं और नाराज़ हैं, ऐसी ख़बरें मीडिया में फैलाने से क्या फायदा? भारतीय जनता पार्टी इस मामले में बेहद भाग्यवान है कि भाजपा का एक-एक कार्यकर्ता भाजपा के विजय के लिए काम कर रहा है।

भाजपा हमेशा कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर परिवारवाद का आरोप लगाती रही है। 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि कांग्रेस से कोई उम्मीद मत कीजिए, लोकतंत्र उनके स्वभाव में नहीं है। वो परिवारवाद की राजनीति से जिंदा हैं और सोचते हैं कि लोग उनकी जेब में हैं। एक तरफ प्रधानमंत्री जी परिवारवाद के खिलाफ बात करते हैं दूसरी तरफ भाजपा ने उत्तर प्रदेश में कई बड़े नेताओं के रिश्तेदारों को मैदान में उतार दिया। उदाहरण के तौर पर… ‘भाजपा के सांसद हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को भी टिकट मिल गया है…. पूर्व मुख्यमंत्री और अब राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह के पौत्र संदीप सिंह को भी चुनाव लड़ने का मौक़ा दिया गया है… भाजपा ने नोएडा से गृह मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह को टिकट दिया है, लखनऊ पूर्व से आशुतोष टंडन मैदान में होंगे… भाजपा दूसरों से कहां अलग है?
WhatsApp Image 2017-02-02 at 5.33.34 PMमैंने पहले भी कहा है, ये परिवारवाद नहीं है। परिवारवाद ये है कि पंडित जवाहर लाल नेहरु जी प्रधानमंत्री बने उनकी बेटी थीं इंदिरा गांधी वो प्रधानमंत्री बनीं, उनके बेटे थे राजीव गांधी, वो प्रधानमंत्री बने। राजीव गांधी के बेटे चूंकि उस समय नहीं बन पाए थे लेकिन अब राहुल गांधी नंबर में लगे हुए हैं। शादी नहीं हुई उनकी, नहीं तो उनका बेटा भी प्रधानमंत्री पद का दावेदार होता. इसे कहते हैं परिवारवाद। मुलायम सिंह यादव जी मुख्यमंत्री रहे वो हटे तो उनका बेटा मुख्यमंत्री बन गया, फारुख़ अब्दुल्ला मुख्यमंत्री थे वो हटे तो उमर अब्दुल्ला मुख्यमंत्री बन गए। परिवारवाद इसे कहते हैं। परिवारवाद ये नहीं है कि कोई भाजपा के लिए काम कर रहा है, वो भाजपा नेता का बेटा या भाई–भतीजा है और वो चुनाव लड़ने और जीतने का मद्दा रखता हो, सर्वे रिपोर्ट में भी यही हो और उसे हम सिर्फ इसलिए टिकट नहीं दें कि वो किसी नेता का बेटा है, तो यह उचित नहीं है। तब तो उसे राजनीति ही नहीं करना चाहिए। उसे तो सपा-बसपा की राजनीति करनी चाहिए। तो इसे परिवारवाद की श्रेणी में मत लाइए। विधायक या सांसद को आप परिवारवाद की सीमा में मत लाइए। जब किसी बड़े पद पर बैठे व्यक्ति क बेटे को बड़े पद पर बैठाने की कोशिश हो तो वो परिवारवाद है।

सपा और भाजपा के घोषणापत्र में क्या फर्क है? दोनों ने मुफ़्त में बहुत सारी चीजें देने का वादा किया गया है, फिर आपका घोषणापत्र अलग कैसे?
दोनों में फर्क यही है कि उनका धोखेबाजी का घोषणापत्र है। उन्होंने साल 2012 में जो घोषणा किया था उसमें से कोई पूरा नहीं किया। भाजपा की 14 राज्यों में सरकारें हैं। भाजपा ने जो कहा सिर्फ उतना ही नहीं उससे ज्यादा किया है। जनता को भाजपा पर विश्वास है कि भाजपा जो कह रही है वो करके देगी। सपा जो कह रही है, वो कर नहीं सकती है। सपा और भाजपा की तुलना हो ही नहीं सकती। दूसरा, उनके घोषणा पत्र और हमारे लोक कल्याण संकल्प पत्र में बहुत बड़ा अंतर है। हमने बहुत अच्छा उत्तर प्रदेश के लिए रोडमैप तैयार किया है। जिससे उत्तर प्रदेश विकसित राज्यों की सूची में आए। बीमारू राज्यों की सूची से बाहर जाए। देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदेश बने।

एक बार फिर राम मंदिर का जिक्र है। क्या भाजपा की सरकार बनती है तो इस बार राम मंदिर बन जाएगा?
ये तो हमने घोषणापत्र में कहा है कि संवैधानिक दायरे में हम पूरी तरह से प्रयास करेंगे कि मंदिर निर्माण की बाधा हटाई जा सकती है वो हटाई जाए।

आपने लोकसभा चुनाव में भी किसी मुसलमान को टिकट नहीं दिया, अब विधानसभा चुनाव में भी नहीं दिया। आप किसी मुसलमान को टिकट क्यों नहीं देते हैं?
जीतने लायक होते तो देते, जीतने लायक नहीं थे इसलिए नहीं दिए।

मतलब पार्टी ये समझ रही है कि मुस्लिम भाजपा से नहीं जुड़ रहे हैं?

हम हिंदू–मुस्लिम की नज़र से नहीं देखते। हमारा कार्यकर्ता और जीतने लायक होगा तो हम देंगे।

मायावती ने 2007 में सोशल इंजीनियरिंग की। दलित-ब्रह्माण गठजोड़ किया और कामयाब रहीं, इस बार उन्होंने दलित-मुस्लिम गठजोड़ किया है। भाजपा के पास इस गठजोड़ का क्या तोड़ है?

इस बार बहन जी के लिए अंगूर बहुत खट्टे हैं। उनकी कोशिश सफल नहीं होगी. वो बहुत हताश, निराश हैं। अब उनके पास जनाधार वाले नेता नहीं हैं। लोग जानते हैं कि वो भ्रष्टाचार की बहुत बड़ी पोषक हैं और गुंडों की बहुत बड़ी संरक्षक हैं। ताजा उदाहरण मुख्तार अंसारी को पार्टी में शामिल करके दिया है। उनके परिवार को टिकट देकर उन्होंने साफ संकेत दे दिया कि गुंडों हो या कोई और उनको पैसा चाहिए। वो पैसा लेकर टिकट देने का काम करती हैं और टिकट बेचने का काम करती हैं। इसलिए उन्हें 2014 में भी उन्हें मुंह की खानी पड़ी थी और जनता ने उन्हें पराजित करने का काम किया था। उन्हें एक भी सीट नहीं मिली। और इस बार भी 2017 में 2014 से बुरा उनका हाल होगा।

नोटबंदी से शहरों में तो ज्यादा नहीं लेकिन गांवों में बहुत दिक्कत हुई है, इससे पार्टी को नुकसान होगा?
नोटबंदी के बाद जहाँ चुनाव हुए वहाँ हमने बहुत बड़ी जीत हासिल की। चाहें वो निकाय चुनाव ही क्यों न रहे हों। और जो नोटबंदी का विरोध कर रहे थे उन्हें करारी पराजय का सामना करना पड़ा। इसलिए वो नोटबंदी का विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में भी नोटबंदी भ्रष्टाचार के खिलाफ, नकली नोटों के खिलाफ लड़ाई थी। जो नकली नोटों की फैक्ट्री चलाते थे, आतंकवादियों को पैदा करने की फैक्ट्री चलाते थे, वो बंद हुए। नक्सलवाद जो पनप रहा था, उसे रोकने में मदद मिली है। राष्ट्रहित में बहुत शानदार काम हुआ है।

बिहार चुनाव के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने आरक्षण के खिलाफ आवाज उठाई और इसका खामियाज़ा आपको भुगतना पड़ा। इस बार भी मनमोहन वैद्य जी ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में इसी तरह की बात की, आपको नहीं लगता कि इससे पार्टी को उत्तर प्रदेश में भी नुकसान हो जाएगा?
ये कोई विषय नहीं है, एक बयान के आधार पर कुछ नहीं होता है। उस पर संघ की तरफ से भी खंडन आ चुका है। किसी के बयान के आधार पर कुछ नहीं होता। ये एक सिस्टम बना हुआ है। माननीय प्रधानमंत्री जी ने भी कहा है कि जब तक इसकी जरूरत होगी दी जाएगी। इसे ख़त्म करने के बारे में अभी सोच विचार ही नहीं हो रहा है। इसलिए आरक्षण कोई मुद्दा नहीं है। 

आपको क्या लगता है उत्तर प्रदेश में आपकी लड़ाई किस पार्टी से है?

अधिकतम 50 सीटों पर सपा और बसपा लड़ रही हैं। कांग्रेस कहीं लड़ाई में नहीं हैं। कह सकता हूँ कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी एक तरफा विजय की तरफ है।

क्या लगता है आप कितनी सीटें जीतेंगे?

300 से 350 सीटें…

पूरा इंटरव्यू आप यहां देखिए…

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3 Comments


  1. // Reply

    teekhe aru sateek sawalo ko sahi tarah rakha bahut acche


  2. // Reply

    sahi shuruaat keep it up


  3. // Reply

    नतीजों के बाद तो यह interview aur bhi prasangik hai.behatreen☺😇

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