लक्ष्मण रेखा से उड़ान तक… आधी-आबादी

लक्ष्मण रेखा

त्रेता में जाकर

कहना है लक्ष्मण से

तुम्हारी खींची रेखा

आज भी जीवित है.

उसका जीवन अनंत है

वो खिंचती चली आ रही है

सदियों से.

लेकिन जब भी उसे देखा है

अपनी धूरी में पाया है.

वो जीवित है.

सांस लेती है मेरे साथ…

कभी माथे की भरी मांग की तरह

तो कभी सूनी कोख की तरह.

कभी भरी मांग के सूने होने पर

और सूनी कोख के भरे होने पर

भ्रूण का लिंग पूछती है.

लक्ष्मण …

तुम्हारी रेखा मुझे डराती है.

कहती है,

मुझे मत लांघना.

उस पार दस सिरों का रावण खड़ा है.

मैं रावण को खड़ा देखती हूं ,

और फिर एक सवाल कौंध जाता है

लक्ष्मण … क्यों नहीं खींची ये रेखा तुमने

रावण की धूरी में…प्रियंका, पत्रकार (देहरादून, उत्तराखंड)

“सम्मान हो या न हो लेकिन असम्मान न किया जाए”

नारी श्रद्धा की मूरत है, ममता का आंचल है, प्रेम, स्नेह और त्याग का रूप है, ईश्वर की अनमोल सौगात है लेकिन जब नारी के साथ अत्याचार होता है तो वही नारी दुर्गा का रूप भी धारण कर सकती है. आप उसका उसका सम्मान करें या न करें, कम से कम उसका अपमान तो न कीजिए. –प्रियंका, गृहणी (हरदोई, उत्तर प्रदेश)

उड़ान

हमारे समाज में बहुत कम लडकियां के जो उड़ान भर पाती है. उड्डान उनके सपनों की, उड़ान उनके इच्छाओं की… इसका कारण एक ही है की हर लडकी अपने सपने पूरे करने के लिए, अपनी इच्छाएं पूरी करने के लिए लढ़ नही पाती. हमारे समाज में हर लडकी जिसे उड़ान भरनी है उसे लड़ना क्यों पड़ता है? क्या बिना लड़े वह अपने सपने पूरे नही कर सकती? कभी अपने माँ-बाप से लड़ना तो कभी ससुराल वालों से या फिर समाज तो है ही.

हर लड़की को अपनी इच्छा के मुताबिक जिंदगी जीने के लिए अपना मन कठोर करना पड़ता है… तभी वह स्वावलंबी बन पाती है. कहते है लड़की लक्ष्मी का रूप होती है तो फिर उससे भेदभाव क्यों? आजकल हर क्षेत्र में लड़कियां काम कर रही है…फिर चाहे वो देश की सेवा हो या दुकान में सामान बेचना. लड़कियां भावुक होती है पर वक्त आने पर हिम्मत भी दिखाती है. हर वह लड़की जो आज स्वावलंबी है, उसने यहां तक पहुँचने के लिए बहुत कुछ खोया है. उसे और परेशानियों का सामना ना करना पड़े इसका ध्यान समाज के हर व्यक्ति को रखना चाहिए. हर वह लड़की जो स्वावलंबी बनना चाहती है, उसे प्रोत्साहन देना समाज का कर्तव्य है. महिलाओं को सम्मान केवल महिला दिवस पर ना दे….वह हर दिन सम्मान की पात्र है. उन्हें स्वावलंबी बनने के लिए अपने परिवार का साथ जरूरी है. समाज की मान्यता जरूरी है. अगर लडकों के विकास के लिए अपने कदम रोकते नही तो लड़कियों के लिए भी हमारे कदम रूकने नहीं चाहिए. हर लडकी को अपनी पहचान बनाने के लिए सबका साथ जरूरी है.-कामिनी, पत्रकार (मुंबई , महाराष्ट्र) [sgmb id=”1″]

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